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भौतिक भूगोल की परिभाषा दीजिए और उसके विषय क्षेत्र की व्याख्या कीजिये Study Fi

भौतिक भूगोल की परिभाषा दीजिए और उसके विषय क्षेत्र की व्याख्या कीजिये Study Fi

Q. 1. Define Physical Geography and discuss its scope. (भौतिक भूगोल की परिभाषा दीजिए और उसके विषय क्षेत्र की व्याख्या कीजिये) Or, What is utility of Physical Geography? अथवा, (भौतिक भूगोल की क्या उपयोगिता है ? )

Ans. भूगोल एक गतिशील विज्ञान है, जिसका अध्ययन पृथ्वी की उत्पत्ति के साथ ही प्रारम्भ हो गया था। परन्तु उसका स्वरूप, अध्ययन-क्षेत्र और उद्देश्य समय परिवर्तन के साथ परिवर्तित होते रहे हैं। मानव को सृष्टि जगत का सबसे बुद्धिमान प्राणी माना जाता है। वह पृथ्वी के बारे में नयी जानकारी प्राप्त करने के लिये हमेशा प्रयत्नशील रहता है। भूगोल में पृथ्वी धरातल पर पायी जाने वाली विषमताओं तथा अनेक तत्वों का सूक्ष्म रूप में अध्ययन किया जाता है। सबसे पहले इरैस्टोस्थनीज नामक यूनानी विद्वान ने पृथ्वी का मानचित्र बनाया और भूगोल का वैज्ञानिक दृष्टि से अध्ययन किया। इसके बाद हैरोडोट्स तथा स्ट्बो व टालेमी नामक विद्वानों ने भूगोल को एक नया रूप दिया। गत शताब्दी में भी चेम्बरलेन, मोल्टन, जैफरी, जेम्स जीन्स आदि विद्वानों ने सौरमण्डल की उत्पत्ति तथा पृथ्वी का एक ग्रह के रूप में अध्ययन किया। इनके पश्चात् वेगनर, डेली, स्वेस, डुटोइट व गौकों आदि विद्वानों ने भूगर्भशास्त्र के क्षेत्र में महत्त्वपूर्ण अध्ययन किये। ब्रुकनर, सिम्पसन, हम्फ्रीज, मरे, डार्विन जेकिन्स आदि प्रसिद्ध विद्वानों ने ऋतु विज्ञान व समुद्र विज्ञान के बारे में महत्त्वपूर्ण तथ्य प्रतिपादित किये। इस प्रकार विभिन्न क्षेत्रों में अध्ययन पूर्ण होने से भौतिक भूगोल का क्षेत्र अधिक विस्तृत हो गया।

भौतिक भूगोल की परिभाषा'भूगोल' शब्द को उत्पत्ति लेटिन भाषा से हुयी मानी जाती है। यह अंग्रेजी भाषा के 'Geography' शब्द का ही हिन्दी रूपांतर है, जिसमें 'Ge' का अर्थ पृथ्वी तथा 'graphy' का अर्थ 'वर्णन करना' माना गया है। अर्थात् भूगोल वह विज्ञान है, जिसमें पृथ्वी के समस्त क्रियाकलापों व घटनाओं का अध्ययन किया जाता है। इसके विषय में वूलरिज तथा इस्ट महोदय ने कहा है कि "Geography concerns land and man". अर्थात् भूगोल में मानव और भूमि दोनों का अध्ययन किया जाता है।
1. ए. के. लोबेक के अनुसार, "भौतिक पर्यावरण का अध्ययनमात्र हो भू-भौतिकी का सार है।"  

2. आर्थर होम्स के अनुसार, "भौतिक पर्यावरण का अध्ययन ही भौतिक भूगोल है, जिसके अन्तर्गत पृथ्वी के धरातलीय उच्चावचन, सागरीय एवं महासागरीय तथा वायुमण्डलीय क्षेत्र आते हैं।'

3. टार व एन्जिल के अनुसार, "भौतिक भूगोल पृथ्वी के भौतिक तत्वों का अध्ययन तथा मनुष्य पर होने वाले उनके प्रभावों का अध्ययन है।" उपर्युक्त परिभाषाओं से यह निष्कर्ष निकलता है कि भौतिक भूगोल में मुख्यतः स्थलमण्डल, जलमण्डल और वायुमण्डल का विस्तृत अध्ययन किया जाता है।

भौतिक भूगोल का विषय-क्षेत्र - भौतिक भूगोल में भौतिक वातावरण तथा मानव के - पारस्परिक संबंधों का अध्ययन किया जाता है। मनुष्य व भौतिक वातावरण के बीच कितना सुदृढ़ सम्बन्ध है, यही भौतिक भूगोल का विषय-क्षेत्र है। भौतिक वातावरण के अन्तर्गत चट्टानों की रचना,मिट्टी, खनिज पदार्थ, जलाशयों तथा जलवायु आदि तथ्यों का विस्तृत अध्ययन किया जाता है। इस प्रकार यह कहा जा सकता है कि भौतिक भूगोल के अन्तर्गत 1.स्थलमण्डल, 2.जलमण्डल और 3.वायुमण्डल तीनों का सम्मिलित रूप में अध्ययन किया जाता है।
 स्थलमण्डल के अन्तर्गत पृथ्वी के स्थल भाग तथा उसके विभिन्न रूपों का अध्ययन किया जाता है। इसके अन्तर्गत उन सभी घटनाओं का भी अध्ययन किया जाता है, जिनके फलस्वरूप पृथ्वी तल को यह रूप प्राप्त हुआ है। जलमण्डल के अन्तर्गत जलीय दशाओं का अध्ययन किया जाता है। इसी प्रकार वायुमण्डल के अन्तर्गत वायुमण्डलीय दशाओं, मुख्य रूप से जिनका प्रभाव प्राणिजगत पर प्रत्यक्ष तथा अप्रत्यक्ष रूप से पड़ता है, का अध्ययन किया जाता है। इस प्रकार भौतिक भूगोल में स्थल, जल तथा वायुमण्डल तीनों के हो अध्ययन को इसकी विषय-सामग्री के अन्तर्गत सम्मिलित किया जाता है।

भौतिक भूगोल की उपयोगिता-प्रसिद्ध भूगोलवेत्ता हार्टशोर्न ने भौतिक भूगोल के उद्देश्य को स्पष्ट रूप में प्रस्तुत करते हुए कहा है कि "The purpose of geography is the scientific description of the earth as the world of man" अर्थात् पृथ्वी का मानवीय संसार के रूप में वैज्ञानिक ढंग से वर्णन करना ही भूगोल का उद्देश्य है। मानवीय संसार के रूप में पृथ्वी का वैज्ञानिक ढंग से अध्ययन तभी किया जा सकता है जब मनुष्य और उसके भौतिक वातावरण के पारस्परिक सम्बन्धों को अच्छी तरह समझ लिया जाये। जिस क्षेत्र की जैसी भौतिक परिस्थितियाँ होती हैं, मानव अपने आप को उसी रूप में ढाल लेता है, तथा भौतिक परिस्थितियाँ से समझौता करके चलता है। मनुष्य के सम्पूर्ण क्रियाकलाप भौतिक वातावरण से प्रभावित होते हैं। इस तरह मानव भौतिक परिस्थितियों से अलग होकर स्वतंत्र रूप में कार्य नहीं कर सकता है ।

वर्तमान वैज्ञानिक युग में मानव ने नयी तकनीकों के प्रयोग द्वारा भौतिक परिस्थितियों से प्रतिकूल कार्य भी किया है। मानव ने अपने ज्ञान के द्वारा भौतिक परिस्थितियों पर विजय हासिल की है, जिससे मानव की निर्भरता कम हुई है। लेकिन पृथ्वी में होने वाले परिवर्तन कैसे, कब और क्यों होते हैं ? इन सब प्रश्नों का हल करने के लिए भौतिक भूगोल का विस्तृत अध्ययन करना अत्यंत आवश्यक है।

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